कलकत्ता हाई कोर्ट में आज (बुधवार, 14 जनवरी को) कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े ED के छापे मामले की सुनवाई हो रही है। इस मामले में केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।
पिछली तारीख यानी 9 जनवरी को अदालत में अफरा-तफरी और भीड़भाड़ के कारण सुनवाई नहीं हो पाई थी। उसके बाद जस्टिस शुभ्रा घोष ने आज की तारीख मुकर्रर की थी।
सुनवाई के दौरान ED ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर हो रही छापेमारी के दरम्यान नाटकीय तौर पर एंट्री की थी और सरकारी काम में बाधा डाला। ED ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रेड वाली जगहों पर गईं और अहम सबूत ले गईं। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी की तरफ से दावा किया गया कि ईडी के छापे अवैध थे और जांच एजेंसी ने सारी सीमएं लांघ दी थी। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस ने ईडी द्वारा जब्त किये गये चुनाव संबंधी उसके डाटा की सुरक्षा के लिए अदालत से गुहार लगाई।
सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध
ईडी ने उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। ED की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस वी राजू ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की हैं। इसलिए हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई न करे। उन्होंने दलील दी, “यह मामला सुप्रीम कोर्ट में आ सकता है। लिहाजा, इस मामले की सुनवाई को टाल दिया जाए। आज सुनवाई नहीं होने से कोई आसमान फटकर नहीं गिरने वाला है।”
I-PAC की गैरमौजूदगी पर भी सवाल
ASG राजू ने हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान I-PAC की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म को कोर्ट में पेश होना चाहिए था। उन्होंने कहा, “पूरी याचिका चुनाव से जुड़े तर्कों पर आधारित है, न कि किसी अधिकार के उल्लंघन पर। किसी के घर से किसी का डेटा ज़ब्त किया गया है, उन्हें तो कोर्ट आना चाहिए था। I-PAC को यहां आना चाहिए था।”
क्या है मामला?
बता दें कि 8 जनवरी को कोलकाता में IPAC के निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान, तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ईडी के तलाशी अभियान स्थलों पर पहुंच गई थीं और आरोप लगाया कि निदेशालय के जांचकर्ता कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के संवेदनशील डेटा को जब्त करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बनर्जी पर मौके से दस्तावेज हटाने का भी आरोप लगाया।
तृणमूल कांग्रेस और ईडी दोनों ने छापेमारी को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। तृणमूल कांग्रेस ने एजेंसी को तलाशी अभियान के दौरान जब्त किए गए आंकड़ों के “पूर्वाग्रह, दुरुपयोग और प्रसार” से रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की, जबकि ईडी ने अपनी जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए आठ जनवरी की घटनाओं की जांच सीबीआई को सौंपने की प्रार्थना की।

