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अमेरिकी कंपनी अमेजन-गूगल पर लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ? RSS से जुड़े संगठन ने की अधिक कर लगाने की मांग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने भारत सरकार से देश में संचालित होने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे अमेजन,

गूगल और अन्य अमेरिकी कंपनियों पर अधिक कर लगाने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि ये कंपनियां अक्सर भारतीय कानूनों का उल्लंघन करती हैं,

कर चोरी करती हैं और भारतीय बाजार का शोषण करती हैं बिना अर्थव्यवस्था में उचित योगदान दिए. महाजन ने कहा कि ऐसी अमेरिकी कंपनियां जो भारतीय कानूनों का पालन नहीं करतीं,

उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. भारत में व्यवसाय करते समय ऐसी कंपनियों को जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

उन्होंने अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में कठोर और “हठधर्मी” रवैये की आलोचना की, लेकिन कहा कि इससे भारत को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा,

क्योंकि अमेरिका स्वयं कई वस्तुओं का उत्पादन नहीं करता. महाजन ने बताया कि भारत के पास फार्मास्यूटिकल्स, दवाइयों और बासमती चावल जैसे क्षेत्रों में मजबूत स्थिति है,

जो देश को स्वतंत्र व्यापार नीतियां बनाने की शक्ति देती है. उन्होंने टिकटॉक के प्रतिबंध का उदाहरण दिया, जिसके बाद कई भारतीय विकल्प सफलतापूर्वक उभरे.

महाजन ने कहा कि यह आत्मनिर्भरता की ताकत दिखाता है. कर लगाने के साथ-साथ सरकार को विदेशी मंचों के भारतीय विकल्पों को विकसित करने और समर्थन करने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए.

उन्होंने कहा कि हाल के अमेरिकी कदमों से टेक्सटाइल, हस्तशिल्प, और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, लेकिन भारत के लगभग 40 प्रतिशत निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ा है.

उन्होंने इस प्रतिकूल प्रभाव को अस्थायी बताया और जोर दिया कि भारत को अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकना चाहिए.

उन्होंने कहा कि अगर भारत अब अमेरिका की मांगों के सामने झुक गया, तो यह हमेशा के लिए झुकने की खतरनाक मिसाल कायम करेगा.

भारत एक महान राष्ट्र है और किसी भी देश की दया पर निर्भर नहीं है. महाजन ने भारत की ऊर्जा रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि रूसी कच्चे तेल के आयात से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है.

उन्होंने कहा कि ऐसे आयात को रोकना कोई विकल्प नहीं है. भारत के हित में यह जरूरी है कि हम वहां से तेल खरीदें जहां से सबसे अधिक लाभ हो.

उन्होंने अमेरिकी निर्भरता के विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस निर्भरता के बावजूद, वे भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए भारत पर दबाव बनाना जारी रखते हैं. इसे अनियंत्रित रूप से चलने देना स्वीकार्य नहीं है.