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RSS को लेकर उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान कहा वक्त आ गए है इनको अब

शांतिपूर्ण बातचीत का समर्थन करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की इस बात का जिक्र किया कि ‘दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं’,

उमर अब्दुल्ला ने पत्र और अपील पर बीजेपी के रुख पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ”शांति प्रयासों का समर्थन करने के लिए जम्मू-कश्मीर के नेताओं की आलोचना क्यों की जाती है,

जबकि आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा की गई ऐसी ही अपीलों पर कोई आलोचना नहीं होती.”
CM उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा, “आरएसएस पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का समर्थन करता है,

अगर RSS ऐसा कहता है तो यह ठीक है, लेकिन अगर कश्मीरी नेतृत्व यही मांग करता है तो हंगामा खड़ा हो जाता है.”

हिंसा से कोई समाधान नहीं निकला है- उमर अब्दुल्ला
भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों को प्रमुख नागरिकों द्वारा लिखे गए पत्र के ज़रिए सामान्य संबंध बहाल करने की हालिया पहलों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए,

उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि हिंसा से कोई समाधान नहीं निकला है और कूटनीतिक बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है.

‘रचनात्मक बातचीत के लिए अनुकूल माहौल की जरूरत’
शांति पहलों का मजबूती से समर्थन करते हुए, उमर अब्दुल्ला ने पहले भी कहा है कि रचनात्मक बातचीत के लिए अनुकूल माहौल की जरूरत होती है

और पाकिस्तान को सीमा पार घुसपैठ और उग्रवादी हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.
उमर अब्दुल्ला ने पहले भी इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि सीमा पार की

शत्रुता का सीधा असर जम्मू-कश्मीर पर पड़ता है, जिससे अतीत में नागरिकों की मौतें हुई हैं, सीमावर्ती इलाकों से लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और स्थानीय आर्थिक विकास में बाधा आई है.