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नितिन गडकरी के बेटे की संपत्ति को लेकर दिमाग हिलाने वाली सच्चाई आई देश के सामने

नई दिल्‍ली. देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति पर इन दिनों खूब विवाद हो रहा है. लोगों की शिकायत है कि ई-20 पेट्रोल से उनकी गाडियों के इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज गिर रही है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एथेनॉल के बड़े समर्थक हैं और कई बार कह चुके हैं ई-20 पेट्रोल वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है.

कुछ लोग तो उन पर अपने बेटों के एथेनॉल बिजनेस को फायदा पहुंचाने के लिए इस नीति को बढ़ावा देने का भी आरोप लगा रहे हैं.

हितों के टकराव (Conflict of Interest) के इन गंभीर आरोपों का अब नितिन गडकरी ने जवाब दिया है. गडकरी ने कहा है कि उनके बेटों के कारोबार में एथेनॉल की हिस्सेदारी न के बराबर है.

उन पर लगाए जा रहे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं. गौरतलब है कि नितिन गडकरी के दो बेटे हैं. बड़े बेटे का नाम निखिल गडकरी और छोटे बेटे का नाम सारंग गडकरी है.

उनके एथेनॉल और चीनी मिलों के कारोबार मुख्य रूप से सियान एग्रो इंडस्ट्रीज (CIAN Agro Industries) और मानस एग्रो इंडस्ट्रीज इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Manas Agro Industries) संचालित करती हैं.

सिर है 1600 करोड़ का कर्ज
टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, नितिन गडकरी ने कहा है कि बेटों के बिजनेस से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है.

गडकरी ने कहा कि उनके परिवार की चीनी मिल एथेनॉल पर चर्चा शुरू होने से बहुत पहले की है. उन्‍होंने कहा कि कि उनके बेटों की कंपनी की कुल कमाई में एथेनॉल का योगदान बेहद मामूली है.

यही नहीं, इस कारोबार पर करीब 1,600 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज भी है. उन्‍होंने कहा कि न ही पारिवारिक बिजनेस चलाते हैं और न ही एथेनॉल की कीमत तय करने

या उसकी सरकारी खरीद प्रक्रिया निर्धारित करने में उनकी भूमिका होती है. एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पेट्रोलियम मंत्रालय चलाता है और इसकी कीमत केंद्रीय मंत्रिमंडल तय करता है.

उन्होंने कहा कि वे सिर्फ गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की वकालत नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने मक्का, बांस और यहां तक कि किसानों की पराली से एथेनॉल बनाने को बढ़ावा दिया है.

वाजपेयी और मनमोहन सरकार ने दिया बढ़ावा
गडकरी ने उन दावों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि यह नीति उन्होंने खुद के फायदे के लिए बनाई है.

उन्होंने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने (Ethanol Blending) के कार्यक्रम की शुरुआत उनके कार्यकाल में नहीं, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय हुई थी. इसके बाद कांग्रेस की यूपीए (UPA) सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया.