राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के मुसलमानों को लेकर दिए बयान का स्वागत किया।(हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे बयान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उनकी भावना का असर जमीन पर भी दिखाई दे। उमर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
देश के अन्य हिस्सों में मुसलमानों को कई बार मकान किराये पर लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को भी धर्म के आधार पर भेदभाव झेलना पड़ा है। (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
उन्होंने कहा कि यदि मुसलमानों को बाहरी मानने वाले लोग सच्चे हिंदू नहीं हैं, तो इस विचार को व्यवहार में भी उतारा जाना चाहिए। (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
बता दें कि न्यूयॉर्क में ‘एक विश्व एक मानवता’ कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
तो वह हिंदू नहीं रह सकता। यदि आप स्वयं को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी मार्ग एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
और प्रत्येक मनुष्य का अपना सम्मान है। मनुष्यों में कोई भेद नहीं है। राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर भाजपा की ओर से इस्तीफा देकर नया जनादेश लेने की मांग को उमर ने खारिज कर दिया। (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
उन्होंने कहा, “मैं नेता प्रतिपक्ष की खुशी के लिए इस्तीफा नहीं दूंगा।” उमर ने कहा कि जनता ने उनकी सरकार को पांच साल का जनादेश दिया है (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
और कार्यकाल पूरा होने पर सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखेगी। सरकारी नियुक्तियों में कथित बैकडोर एंट्री के आरोपों पर उमर ने कहा (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
कि एंटी करप्शन ब्यूरो, क्राइम ब्रांच और सीआइडी उनके नियंत्रण में नहीं हैं। उन्होंने भाजपा पर बिना सबूत आरोप लगाने (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)
और अपनी कमियों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार को निशाना बनाने का आरोप लगाया। (हमें सपोर्ट करने के लिए नीचे ऐड पर क्लिक करे)


